जब-जब धार्मिक सिद्धांतों में गिरावट आती है और अधर्म दिन-प्रतिदिन बढ़ता जाता है, तब-तब ब्रह्मा आदि देवता भगवान के चरणों में साधुओं की रक्षा करने और दुष्टों का नाश करने के लिए प्रार्थना करते हैं।
Whenever there is a decline in religious principles and unrighteousness increases day by day, then the gods like Brahma etc. pray at the feet of God to protect the saints and destroy the wicked.
तात्पर्य
जब भगवान के विरोधी जीव क्षणभंगुर भौतिक सुखों के बीच रहते हैं, तो उनकी भौतिक अवधारणाएँ धीरे-धीरे बढ़ती जाती हैं। सतयुग से त्रेता युग और फिर द्वापर युग तक धार्मिक सिद्धांत धीरे-धीरे कम होते जाते हैं और भौतिक सुखों के लिए प्रवृत्ति धीरे-धीरे बढ़ती जाती है। इसी समय, धार्मिक गतिविधियों की कमी के कारण, अधर्मी गतिविधियाँ अधिक प्रमुख हो जाती हैं। आरोही प्रक्रिया एक तरह का अधर्म है, क्योंकि इस प्रक्रिया में श्री अदृक्षाज के प्रति कोई सेवा भाव नहीं होता है। भगवान के शुद्ध भक्त जो अधोक्षज की सेवा में लगे होते हैं, वे हमेशा सशर्त रहने वाले जीवों के अधार्मिक प्रयासों से परेशान रहते हैं। मानसिक सटोरिये खुद को पाँच प्रकार के ऐश्वर्य से धनी और शक्तिशाली मानते हैं: (1) जुआ, (2) शराब पीना, (3) अवैध यौन संबंध, (4) पशु वध, और (5) सोना। इस प्रकार वे परम सत्य पर हमला करने का प्रयास करते हैं, जो जीवों के शाश्वत लाभ के लिए अवतरित होता है। मानसिक सटोरियों के ऐसे प्रयासों की जाँच करने और उन्हें उनके मार्ग से भटकाने के लिए, अनंत रूप से शक्तिशाली, अज्ञानता का नाशकर्ता और राक्षसों को भ्रमित करने वाला, परमेश्वर सत्य, भगवान विष्णु अवतरित होते हैं। इस तरह भगवान ब्रह्मा प्रत्येक सहस्राब्दी में भगवान के चरण कमलों पर प्रार्थना करते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥