श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 187
 
 
श्लोक  1.2.187 
মুক্তি দিযা যে ভক্তি রাখহ গোপ্য করি’
আমি-সব যে-নিমিত্তে অভিলাষ করি
मुक्ति दिया ये भक्ति राखह गोप्य करि’
आमि-सब ये-निमित्ते अभिलाष करि
 
 
अनुवाद
आप सहज ही मोक्ष प्रदान करते हैं, किन्तु भक्ति को गुप्त रखते हैं। हमारी उस भक्ति को प्राप्त करने की इच्छा है।
 
You easily grant salvation, but you keep devotion a secret. We desire to attain that devotion.
तात्पर्य
इस सम्बन्ध में श्रीमद् भागवत (2.10.6 व 5.6.18) का अवलोकन करना चाहिए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)