सन्ति भूरिणि रूपाणि मम पूर्णानि षड् गुणैः
भवयूस्तानि तुल्यानि न मया गोप-रूपिणा
"मेरे सभी विविध रूप छह समृद्धियों से पूर्ण हैं, लेकिन मेरी ग्वाले के रूप में उपस्थिति से उनकी तुलना नहीं की जा सकती।" पद्म पुराण कहता है:
चरितं कृष्ण-देवस्य सर्वमेवाद्भुतं भवेत्
गोपाल-लीला तत्रापि सर्वतो 'ति-मनोहरा
"कृष्ण की विशेषताएँ निश्चित रूप से अद्भुत हैं, और एक ग्वाले के रूप में उनकी लीलाएँ सबसे अधिक मनमोहक हैं।" तंत्र कहते हैं:
कंदर्प-कोटि-अर्बुद-रूप-शोभा-
नीराज्यपादाब्ज-नखाँ चलस्य
कुत्राप्य दृष्ट-श्रुता-रम्य-काँतेर्
ध्यानं परं नंद-सूतस्य वक्ष्ये
"मैं नंद-सुत पर ध्यान करता हूँ, जिनका सौन्दर्य लाखों कामदेवों से भी बढ़कर है, इस प्रकार वे उनके चरण कमलों और पैर के नाखूनों की पूजा करते हैं। उनका पारलौकिक प्रकाश भौतिक इंद्रियों के वर्णन या दृष्टि से परे है।" श्रीकृष्ण की गोकुल संपर्कपूर्ण लीलाएँ सबसे पूर्ण हैं क्योंकि उनमें कृष्ण की सभी मधुर विनोदी लीलाओं के साथ ही उनके अन्य सभी अवतारों की संपर्कपूर्ण लीलाएँ भी शामिल हैं।
