শ্রী-নারদ-রূপে বীণা ধরি’ কর গান
ব্যাস-রূপে কর নিজ-তত্ত্বের ব্যাখ্যান
श्री-नारद-रूपे वीणा धरि’ कर गान
व्यास-रूपे कर निज-तत्त्वेर व्याख्यान
अनुवाद
“नारद के रूप में आप वीणा लेकर अपनी महिमा का गान करते हैं और व्यास के रूप में आप अपने विषय में सत्य बताते हैं।
“As Narada you sing your glories with the Veena and as Vyasa you tell the truth about yourself.
तात्पर्य
श्रीमद भागवतम (1.3.8) में वर्णित है: "ऋषियों के सहस्राब्द में, भगवान ने देवरषि नारद के रूप में तीसरा सशक्त अवतार लिया, जो देवताओं के बीच एक महान ऋषि हैं। उन्होंने वेदों के वे सभी विवेचन एकत्र किए जो भक्ति सेवा के विषय में हैं और जो निष्काम कर्म को प्रेरित करते हैं।" पुनः श्रीमद भागवतम (1.3.21) से कहा गया है: "इसके बाद, भगवान के सत्रहवें अवतार में, श्री व्यासदेव पराशर मुनि के माध्यम से सत्यवती के गर्भ में प्रकट हुए, और उन्होंने देखा कि सामान्य रूप से लोग कम बुद्धिमान हैं, इसलिए उन्होंने एक वेद को कई शाखाओं और उपशाखाओं में विभाजित किया।"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥