श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 175
 
 
श्लोक  1.2.175 
ধন্বন্তরি-রূপে কর অমৃত প্রদান
হṁস-রূপে ব্রহ্মাদিরে কহ তত্ত্ব-জ্ঞান
धन्वन्तरि-रूपे कर अमृत प्रदान
हꣳस-रूपे ब्रह्मादिरे कह तत्त्व-ज्ञान
 
 
अनुवाद
“आपने धन्वन्तरि के रूप में देवताओं को अमृत प्रदान किया और हंस के रूप में ब्रह्मा आदि को परम सत्य का उपदेश दिया।
 
“You gave nectar to the gods in the form of Dhanvantari and preached the ultimate truth to Brahma and others in the form of a swan.
तात्पर्य
जैसा कि श्रीमद्भागवतम् (2.7.19) में कहा गया है: "हे नारद, आपको भगवान के अवतार हंसावतार द्वारा भगवान और उनकी दिव्य प्रेम भक्ति के विज्ञान के बारे में सिखाया गया था। भक्ति सेवा में आपके गहन अनुपात के कारण वे आपसे बहुत प्रसन्न हुए थे। उन्होंने आपको पूर्ण रूप से भक्ति सेवा के विज्ञान के बारे में भी स्पष्ट रूप से समझाया, जो विशेष रूप से उन लोगों द्वारा समझा जा सकता है जो भगवान वासुदेव, भगवान के व्यक्तित्व को समर्पित हैं।" अन्यत्र, श्रीमद्भागवतम् (1.3.17) में कहा गया है: "द्वादशवें अवतार में, भगवान धन्वंतरि के रूप में प्रकट हुए, और तेरहवें में उन्होंने एक महिला के आकर्षक रूप से नास्तिकों को आकर्षित किया और देवताओं को पीने के लिए अमृत दिया।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)