श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 169
 
 
श्लोक  1.2.169 
মত্স্য-রূপে তুমি জলে প্রলযে বিহার
কূর্ম-রূপে তুমি সর্ব-জীবের আধার
मत्स्य-रूपे तुमि जले प्रलये विहार
कूर्म-रूपे तुमि सर्व-जीवेर आधार
 
 
अनुवाद
"मत्स्य रूप में आप प्रलय के जल में रमण करते हैं। कूर्म रूप में आप समस्त जीवों के आश्रय हैं।
 
"In the form of a fish, you roam in the waters of destruction. In the form of a tortoise, you are the refuge of all living beings.
तात्पर्य
जैसा कि श्रीमद् भागवतम (1.3.15-16) में कहा गया है: "जब चाक्षुष मनु के काल के बाद पूरी तरह से बाढ़ आ गई और संपूर्ण दुनिया पानी में डूब गई, तो भगवान ने मछली का रूप धारण किया और वैवस्वत मनु की रक्षा की, उन्हें एक नाव पर रखा। भगवान का ग्यारहवां अवतार एक कछुए का रूप था जिसका खोल मंदारचल पर्वत के लिए एक धुरी के रूप में कार्य करता था, जिसे ब्रह्मांड के आस्तिकों और नास्तिकों द्वारा मंथन की छड़ के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)