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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 2: भगवान का अवतरण
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श्लोक 165
श्लोक
1.2.165
দিব্য-মেঘ-শ্যাম-বর্ণ হৈযা দ্বাপরে
পূজা-ধর্ম বুঝাও আপনে ঘরে-ঘরে
दिव्य-मेघ-श्याम-वर्ण हैया द्वापरे
पूजा-धर्म बुझाओ आपने घरे-घरे
अनुवाद
"द्वापर युग में आप मानसून के बादल के समान दिव्य श्याम वर्ण में प्रकट होते हैं। आप घर-घर जाकर विग्रह-पूजा का उपदेश देते हैं।
"In the Dvapara Yuga, you appear in a transcendental dark complexion, like a monsoon cloud. You go from house to house, preaching idol worship.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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