तथापि श्री भागवते, गीताय ये कय
ताहा लिखि, ये-निमित्ते ’अवतार’ हय
अनुवाद
फिर भी, मैं श्रीमद्भागवतम् और भगवद्गीता में वर्णित सभी कारण बता रहा हूँ।
Nevertheless, I am giving all the reasons mentioned in Srimad Bhagavatam and Bhagavad Gita.
तात्पर्य
वे लोग जो आरोहण ज्ञान के मार्ग पर हैं, वे इस भौतिक जगत की गतिविधियों के कारण को खोजने की कोशिश करते हैं। यह भौतिक जगत किसी के कार्यों का प्रभाव है जिसे समझना बहुत कठिन है, फिर भी लेखक भगवद-गीता और श्रीमद भागवतम में अर्जुन को भगवान कृष्ण द्वारा बताए अनुसार सभी कारणों के कारण को उचित रूप से बताते हैं, जो वैदिक साहित्य के इच्छा वृक्ष का पका हुआ फल है। लेखक वैष्णव साहित्य के चरणों का अनुसरण करके भगवान कृष्ण के अवतार के कारण की व्याख्या करते हैं बजाय इसके कि वह अपना व्यक्तिगत प्रयास करें। श्रील कावीराज गोस्वामी, हालांकि, ने इन कारणों को गौण और विशेष रूप से विनियामक भक्ति सेवा की प्रक्रिया का पालन करने वाले भक्तों के लिए निश्चित किया है। कावीराज गोस्वामी कहते हैं कि विष्णु के ये अवतार नैमित्तिक या सामयिक अवतार हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥