श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 156
 
 
श्लोक  1.2.156 
সকল সṁসার যাঙ্র ইচ্ছায সṁহারে
সে কি কṁস-রাবণ বধিতে বাক্যে নারে?
सकल सꣳसार याङ्र इच्छाय सꣳहारे
से कि कꣳस-रावण वधिते वाक्ये नारे?
 
 
अनुवाद
जो अपनी इच्छा मात्र से सम्पूर्ण सृष्टि का नाश कर देता है, क्या वह केवल आदेश देकर रावण या कंस का वध नहीं कर सकता?
 
He who destroys the entire universe by his mere wish, can he not kill Ravana or Kansa by merely giving orders?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)