कृष्ण द्वारा इस दुनिया में अपना लीला कार्य पूरा करने के बाद, वैदिक धार्मिक सिद्धांत, संत और ब्राह्मण आश्रय विहीन हो गए और गिर गए। श्री गौरसुंदर ने बौद्ध धर्म, जैन धर्म और तर्कवादियों के तर्क के मार्ग के गैर-वैदिक दर्शन को नष्ट कर दिया और इस तरह वैदिक धार्मिक सिद्धांतों, संतों और ब्राह्मणों की प्रतिष्ठा की रक्षा की। श्री गौरसुंदर गैर-भक्तों के लिए मृत्यु के व्यक्तिीकरण की तरह हैं, जैसे कि भौतिक इच्छाओं वाले व्यक्ति, फल कर्म करने वाले और सट्टेबाज।
