श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 152
 
 
श्लोक  1.2.152 
জয জয বেদ-ধর্ম-সাধু-বিপ্র-পাল
জয জয অভক্ত-দমন-মহাকাল
जय जय वेद-धर्म-साधु-विप्र-पाल
जय जय अभक्त-दमन-महाकाल
 
 
अनुवाद
"वैदिक सिद्धांतों के रक्षक, संतों और ब्राह्मणों की जय हो। अभक्तों का नाश करने वाले काल के साक्षात् स्वरूप की जय हो।
 
"Victory to the protectors of Vedic principles, to the saints and brahmins. Victory to the very form of time, the destroyer of the ungrateful.
तात्पर्य
श्रीमद् भागवतम (1.3.16) की अपनी व्याख्या में श्री माधवाचार्य ने श्रुतियों से निम्नलिखित श्लोक उद्धृत किया है: "वह भगवान हैं, सभी ब्रह्मांडों के पालनहार, नियंत्रक और रक्षक हैं। वह भगवान विष्णु हैं।"

कृष्ण द्वारा इस दुनिया में अपना लीला कार्य पूरा करने के बाद, वैदिक धार्मिक सिद्धांत, संत और ब्राह्मण आश्रय विहीन हो गए और गिर गए। श्री गौरसुंदर ने बौद्ध धर्म, जैन धर्म और तर्कवादियों के तर्क के मार्ग के गैर-वैदिक दर्शन को नष्ट कर दिया और इस तरह वैदिक धार्मिक सिद्धांतों, संतों और ब्राह्मणों की प्रतिष्ठा की रक्षा की। श्री गौरसुंदर गैर-भक्तों के लिए मृत्यु के व्यक्तिीकरण की तरह हैं, जैसे कि भौतिक इच्छाओं वाले व्यक्ति, फल कर्म करने वाले और सट्टेबाज।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)