श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 150
 
 
श्लोक  1.2.150 
ভক্তি করি’ ব্রহ্মাদি-দেবের শুন স্তুতি
যে গোপ্য-শ্রবণে হয কৃষ্ণে রতি-মতি
भक्ति करि’ ब्रह्मादि-देवेर शुन स्तुति
ये गोप्य-श्रवणे हय कृष्णे रति-मति
 
 
अनुवाद
अब कृपया ब्रह्मा आदि देवताओं द्वारा की जा रही प्रार्थनाओं को भक्तिपूर्वक सुनें। इन प्रार्थनाओं को सुनने से मनुष्य का मन कृष्ण में आसक्त हो जाता है।
 
Now, please listen with devotion to the prayers offered by the demigods, such as Brahma and others. Listening to these prayers makes a person's mind attached to Krishna.
तात्पर्य
यदि कोई भगवान ब्रह्मा के नेतृत्व में देवताओं द्वारा श्री गौरसुन्दर को अर्पित सबसे गोपनीय प्रार्थनाओं को सुनता है, तो निश्चित रूप से कृष्ण के प्रति उसका लगाव बढ़ेगा।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)