श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 148
 
 
श्लोक  1.2.148 
অবতীর্ণ হৈবেন ঈশ্বর জানিযা
ব্রহ্মা-শিব-আদি স্তুতি করেন আসিযা
अवतीर्ण हैबेन ईश्वर जानिया
ब्रह्मा-शिव-आदि स्तुति करेन आसिया
 
 
अनुवाद
यह जानते हुए कि परम भगवान प्रकट होंगे, भगवान ब्रह्मा और भगवान शिव जैसे व्यक्तित्व प्रार्थना करने आए।
 
Knowing that the Supreme Lord would appear, personalities like Lord Brahma and Lord Shiva came to offer prayers.
तात्पर्य
श्रीमद् भागवतम् (11.5.33-34) में नौ योगेन्द्रों में से एक करभाजन मुनि ने निम्मी महाराज को इस प्रकार सुनाया: "मेरे प्रिय प्रभु, आप महा-पुरुष हैं, भगवान का सर्वोच्च व्यक्तित्व, और मैं आपके चरण कमलों की पूजा करता हूँ, जो ध्यान के एकमात्र शाश्वत उद्देश्य हैं। वे पैर भौतिक जीवन की शर्मनाक स्थितियों को नष्ट करते हैं और स्वतंत्र रूप से आत्मा की सबसे बड़ी इच्छा, ईश्वर के शुद्ध प्रेम की प्राप्ति को देते हैं। मेरे प्रिय भगवान, आपके चरण कमल सभी पवित्र स्थानों और भक्ति सेवा की कतार में सभी संत प्राधिकारियों का आश्रय हैं और शक्तिशाली देवताओं जैसे भगवान शिव और भगवान ब्रह्मा द्वारा सम्मानित किए जाते हैं। मेरे भगवान, आप इतने दयालु हैं कि आप स्वेच्छा से उन सभी की रक्षा करते हैं जो केवल आपके प्रति सम्मान के साथ झुकते हैं, और इस प्रकार आप दयापूर्वक अपने सेवकों के सभी संकटों से छुटकारा दिलाते हैं। निष्कर्ष में, मेरे प्रभु, आपके चरण कमल वास्तव में जन्म और मृत्यु के सागर को पार करने के लिए उपयुक्त नाव हैं, और इसलिए भगवान ब्रह्मा और भगवान शिव भी आपके चरण कमलों का आश्रय चाहते हैं।

"हे महा-पुरुष, मैं आपके चरण कमलों की पूजा करता हूँ। आपने भाग्य की देवी और उसके सभी वैभव का साथ छोड़ा है, जिसका त्याग करना सबसे कठिन है और महान देवताओं द्वारा भी लालायित है। धर्म के मार्ग के सबसे वफादार अनुयायी होने के कारण, आपने इस प्रकार एक ब्राह्मण के शाप के कारण जंगल के लिए प्रस्थान किया। केवल दयालुता से आप पतित परिस्थित आत्माओं का पीछा करते हैं, जो हमेशा भ्रम के झूठे आनंद की खोज में रहती हैं, और उसी समय अपने खुद के वांछित उद्देश्य, भगवान श्यामसुंदर को खोजने में संलग्न हैं।"

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)