"हे महा-पुरुष, मैं आपके चरण कमलों की पूजा करता हूँ। आपने भाग्य की देवी और उसके सभी वैभव का साथ छोड़ा है, जिसका त्याग करना सबसे कठिन है और महान देवताओं द्वारा भी लालायित है। धर्म के मार्ग के सबसे वफादार अनुयायी होने के कारण, आपने इस प्रकार एक ब्राह्मण के शाप के कारण जंगल के लिए प्रस्थान किया। केवल दयालुता से आप पतित परिस्थित आत्माओं का पीछा करते हैं, जो हमेशा भ्रम के झूठे आनंद की खोज में रहती हैं, और उसी समय अपने खुद के वांछित उद्देश्य, भगवान श्यामसुंदर को खोजने में संलग्न हैं।"
