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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 2: भगवान का अवतरण
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श्लोक 147
श्लोक
1.2.147
মহা-তেজো-মূর্তিমন্ত হৈল দুই-জনে
তথাপিহ লখিতে না পারে অন্য-জনে
महा-तेजो-मूर्तिमन्त हैल दुइ-जने
तथापिह लखिते ना पारे अन्य-जने
अनुवाद
पति-पत्नी दोनों ने शानदार आध्यात्मिक तेज प्रकट किया, जिसे आम लोग नहीं समझ सकते थे।
Both husband and wife manifested brilliant spiritual radiance, which ordinary people could not understand.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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