श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 144-145
 
 
श्लोक  1.2.144-145 
ধর্ম-তিরোভাব হৈলে প্রভু অবতরে
’ভক্ত-সব দুঃখ পায’ জানিযা অন্তরে
তবে মহাপ্রভু গৌরচন্দ্র ভগবান্
শচী-জগন্নাথ-দেহে হৈলা অধিষ্ঠান
धर्म-तिरोभाव हैले प्रभु अवतरे
’भक्त-सब दुःख पाय’ जानिया अन्तरे
तबे महाप्रभु गौरचन्द्र भगवान्
शची-जगन्नाथ-देहे हैला अधिष्ठान
 
 
अनुवाद
जब-जब धार्मिक सिद्धांतों के पालन में कमी आती है, भगवान अवतार लेते हैं। भक्तों को कष्ट में देखकर, भगवान गौरचंद्र महाप्रभु जगन्नाथ मिश्र और शचीदेवी के शरीर में प्रकट हुए।
 
Whenever there is a decline in adherence to religious principles, the Lord incarnates. Seeing the suffering of his devotees, Lord Gaurachandra Mahaprabhu appeared in the bodies of Jagannatha Mishra and Shachidevi.
तात्पर्य
जब भी धार्मिक सिद्धांतों में ह्रास आता है, दयालु प्रभु और उनके भक्त उन सिद्धांतों को फिर से स्थापित करने के लिए अवतार लेते हैं। जब भगवान गौराचन्द्र ने अपने भक्तों की दयनीय स्थिति को देखा, तो वे शची और जगन्नाथ के शरीर में प्रकट हुए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)