श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 142
 
 
श्लोक  1.2.142 
জন্ম হৈতে বিশ্বরূপের হৈল বিরক্তি
শৈশবেই সকল-শাস্ত্রেতে হৈল স্ফূর্তি
जन्म हैते विश्वरूपेर हैल विरक्ति
शैशबेइ सकल-शास्त्रेते हैल स्फूर्ति
 
 
अनुवाद
विश्वरूप जन्म से ही विरक्त थे और उन्हें बचपन में ही शास्त्रों का तात्पर्य समझ में आ गया था।
 
Vishwaroop was detached from birth and he understood the meaning of the scriptures in his childhood itself.
तात्पर्य
श्री विश्वरूप अपने जन्म काल से ही कृष्ण भाव से इतर भौतिक सुखों से विमुख रहे। बाल्यावस्था में ही वे सभी शास्त्रों में पारंगत हो गए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)