श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 139
 
 
श्लोक  1.2.139 
তাঙ্ন পত্নী শচী-নাম মহা-পতি-ব্রতা
মূর্তি-মতি বিষ্ণু-ভক্তি সেই জগন্-মাতা
ताङ्न पत्नी शची-नाम महा-पति-व्रता
मूर्ति-मति विष्णु-भक्ति सेइ जगन्-माता
 
 
अनुवाद
उनकी पत्नी परम पवित्र शचीदेवी थीं, जो विश्वव्यापी माता तथा भगवान की भक्ति की साक्षात् प्रतिमूर्ति थीं।
 
His wife was the most pious Sachidevi, who was the embodiment of devotion to the Universal Mother and God.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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