श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 123
 
 
श्लोक  1.2.123 
ভক্ত-সব নিরবধি এক-চিত্ত হৈযা
পূজে কৃষ্ণ-পাদ-পদ্ম ক্রন্দন করিযা
भक्त-सब निरवधि एक-चित्त हैया
पूजे कृष्ण-पाद-पद्म क्रन्दन करिया
 
 
अनुवाद
अन्य भक्त भी आँसू बहा रहे थे क्योंकि वे सभी निरंतर दृढ़ निश्चय के साथ कृष्ण की पूजा कर रहे थे।
 
Other devotees were also shedding tears as they all continued to worship Krishna with unwavering determination.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)