হেন কৃষ্ণ-চন্দ্রের দুর্জ্ঞেয অবতার
তান কৃপা বিনে কা’র শক্তি জানিবার?
हेन कृष्ण-चन्द्रेर दुर्ज्ञेय अवतार
तान कृपा विने का’र शक्ति जानिबार?
अनुवाद
भगवान कृष्ण के अवतारों को समझना बहुत कठिन है। उनकी कृपा के बिना उन्हें समझने की शक्ति किसमें है?
Lord Krishna's incarnations are very difficult to understand. Who has the power to understand them without His grace?
तात्पर्य
कृष्ण की लीलाएँ उन लोगों के लिए बिलकुल ही समझ से बाहर हैं जो अपनी भौतिक इंद्रियों द्वारा प्राप्त ज्ञान से अभिभूत हैं। भौतिक विद्वान सभी ऊर्जाओं और विष्णु के अवतारों के भगवान, कृष्ण को सर्वशक्तिमान चार-हाथ वाले नारायण के स्रोत के रूप में स्वीकार नहीं करते हैं; बल्कि वे उन्हें एक राजनीतिक नायक और यादव वंश का एक साधारण ऐतिहासिक वंशज मानते हैं। दूसरे शब्दों में, कृष्ण को पूर्ण सत्य और सभी कारणों के कारण के रूप में समझने के बजाय, उनकी भौतिक अवधारणाओं के कारण वे उन्हें एक भौतिक रूप वाली एक साधारण जीवित इकाई और भौतिक सुख की विभिन्न वस्तुओं में से एक मानते हैं। जब भगवान कृष्ण, इस दुनिया में प्रकट होते हैं, तो सभी सामयिक लीला-अवतार उनके रूप में जुड़ जाते हैं। यह तथ्य भी अत्यंत समझ से बाहर है। कृष्ण की कृपा के बिना, व्यक्ति अपने स्वयं के प्रयास से कभी भी कृष्ण के विज्ञान को समझ नहीं सकता है। कृष्णचंद्र ने जिनके ऊपर दया करके अपने लीलाओं का खुलासा किया है, केवल उसी व्यक्ति ने उन्हें पूजने का सौभाग्य प्राप्त किया है। इस संबंध में कोई श्रीमद् भागवतम (10.14.3) के श्लोक पर चर्चा कर सकता है जो इस प्रकार शुरू होता है: ज्ञाने प्रयासम उदपास्य।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥