श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 114
 
 
श्लोक  1.2.114 
কেহ বোলে,—’এ ব্রাহ্মণে এই গ্রাম হৈতে
ঘর ভাণ্গি’ ঘুচাইযা ফেলাইমু স্রোতে
केह बोले,—’ए ब्राह्मणे एइ ग्राम हैते
घर भाण्गि’ घुचाइया फेलाइमु स्रोते
 
 
अनुवाद
किसी और ने कहा, “मैं इस ब्राह्मण को शहर से बाहर निकाल दूँगा, इसका घर तोड़ दूँगा और गंगा में फेंक दूँगा।”
 
Someone else said, “I will throw this Brahmin out of the city, demolish his house and throw him into the Ganga.”
तात्पर्य
कुछ लोगों ने सोचा, "इस गांव से श्रीवास पंडित को बाहर निकालने के लिए, हम उनके घर को तोड़ कर गंगा में फेंक देंगे।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)