श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 113
 
 
श्लोक  1.2.113 
মহা-তীব্র নরপতি যবন ইহার
এ আখ্যান শুনিলে প্রমাদ নদীযার’
महा-तीव्र नरपति यवन इहार
ए आख्यान शुनिले प्रमाद नदीयार’
 
 
अनुवाद
"मुसलमान राजा स्वभाव से बहुत क्रूर है। अगर वह इस कीर्तन के बारे में सुनेगा, तो पूरे ज़िले को तकलीफ़ होगी।"
 
"The Muslim king is very cruel by nature. If he hears about this kirtan, the whole district will suffer."
तात्पर्य
शब्द महातित्र का अर्थ है "अति हिंसक" या "भयावह।"

वाक्यांश यवन नरपति का तात्पर्य लोधी और सैयद वंश के राजाओं से है जो बंगाल के प्रशासक थे। यदि ऐसे प्रशासक, जो भक्ति सेवा से ईर्ष्यालु थे, नवद्वीप में दिन-रात कीर्तन के सशक्त प्रवर्तन और प्रचार के बारे में सुनते थे, तो वे बंगाल की राजधानी के नागरिकों पर अत्याचार और यातनाएं देते थे।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)