श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 111
 
 
श्लोक  1.2.111 
চারি ভাই শ্রীবাস মিলিযা নিজ-ঘরে
নিশা হৈলে হরি-নাম গায উচ্চৈঃ-স্বরে
चारि भाइ श्रीवास मिलिया निज-घरे
निशा हैले हरि-नाम गाय उच्चैः-स्वरे
 
 
अनुवाद
हर शाम श्रीवास पंडित और उनके तीन भाई अपने घर में जोर-जोर से हरि नाम का जाप करते थे।
 
Every evening Srivasa Pandit and his three brothers would chant the name Hari loudly in their house.
तात्पर्य
रात्र में, श्रीवासजी की अगुवाई में चारों भाई श्रीवासजी के प्रांगण में जोर से महामंत्र का उच्चारण कर रहे थे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)