श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 108
 
 
श्लोक  1.2.108 
দুঃখ ভাবি’ অদ্বৈত করেন উপবাস
সকল বৈষ্ণব-গণে ছাডে দীর্ঘ শ্বাস
दुःख भावि’ अद्वैत करेन उपवास
सकल वैष्णव-गणे छाडे दीर्घ श्वास
 
 
अनुवाद
दुःख में अद्वैत आचार्य ने उपवास करना प्रारम्भ कर दिया और वैष्णवों ने गहरी आह भरी।
 
In grief, Advaita Acharya started fasting and the Vaishnavas sighed deeply.
तात्पर्य
इस दुनिया के लोगों द्वारा हरि के विषयों के महत्व को न समझ पाने के कारण श्री अद्वैता प्रभु संताप से व्याकुल हो गए और उपवास करना शुरु कर दिया । अन्य भक्त भी निराश बैठे थे और गहरी साँस भर रहे थे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)