श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 100
 
 
श्लोक  1.2.100 
একে একে বলিতে হয পুস্তক-বিস্তার
কথার প্রস্তাবে নাম লৈব, জানি যাঙ্র
एके एके बलिते हय पुस्तक-विस्तार
कथार प्रस्तावे नाम लैब, जानि याङ्र
 
 
अनुवाद
यदि मैं सभी भक्तों के नाम सूचीबद्ध कर दूं तो इस पुस्तक का आकार बढ़ जाएगा, इसलिए मैं उचित समय पर उन नामों का उल्लेख करूंगा जिन्हें मैं जानता हूं।
 
If I were to list the names of all the devotees, this book would swell in size, so I will mention the names I know at the appropriate time.
तात्पर्य
"यदि मैं प्रत्येक साधक का वर्णन करूँगा, तो पुस्तक बहुत विशाल हो जाएगी। इसलिए मैं उचित जगह पर ही वही वर्णन करूँगा जो मैं जानता हूँ।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)