श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 17: भगवान की गया यात्रा  »  श्लोक 9-10
 
 
श्लोक  1.17.9-10 
চিত্তে ইচ্ছা হৈল আত্ম-প্রকাশ করিতে
ভাবিলেন—“আগে আসি’ গিযা গযা হৈতে”
ইচ্ছা-ময শ্রী-গৌরসুন্দর ভগবান্
গযা-ভূমি দেখিতে হৈল ইচ্ছা তা’ন
चित्ते इच्छा हैल आत्म-प्रकाश करिते
भाविलेन—“आगे आसि’ गिया गया हैते”
इच्छा-मय श्री-गौरसुन्दर भगवान्
गया-भूमि देखिते हैल इच्छा ता’न
 
 
अनुवाद
भगवान् स्वयं प्रकट होना चाहते थे, किन्तु उन्होंने सोचा कि पहले उन्हें गया जाना चाहिए। परम स्वतंत्र भगवान् गौरसुन्दर पवित्र गया स्थान के दर्शन करना चाहते थे।
 
The Lord wanted to manifest Himself, but He thought He should first go to Gaya. The supremely independent Lord Gaurasundara wanted to visit the sacred Gaya place.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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