| श्री चैतन्य भागवत » खण्ड 1: आदि-खण्ड » अध्याय 17: भगवान की गया यात्रा » श्लोक 87 |
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| | | | श्लोक 1.17.87  | পুরী বলে,—“কি-কার্যে করিবে আর পাক?
যে অন্ন আছযে, তাহা কর’ দুই-ভাগ | पुरी बले,—“कि-कार्ये करिबे आर पाक?
ये अन्न आछये, ताहा कर’ दुइ-भाग | | | | | | अनुवाद | | ईश्वर पुरी ने कहा, "फिर से खाना पकाने की क्या ज़रूरत है? जो कुछ तुम्हारे पास है, उसे दो भागों में बाँट लो।" | | | | Ishwar Puri said, "Why cook again? Divide whatever you have into two parts." | |
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