| श्री चैतन्य भागवत » खण्ड 1: आदि-खण्ड » अध्याय 17: भगवान की गया यात्रा » श्लोक 7 |
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| | | | श्लोक 1.17.7  | প্রভু সে আবিষ্ট হৈ’ আছেন অধ্যযনে
ভক্ত-সব দুঃখ পায,—দেখেন আপনে | प्रभु से आविष्ट है’ आछेन अध्ययने
भक्त-सब दुःख पाय,—देखेन आपने | | | | | | अनुवाद | | यद्यपि भगवान अध्ययन और अध्यापन में लीन थे, फिर भी उन्होंने भक्तों की व्यथा देखी। | | | | Although the Lord was engrossed in study and teaching, He saw the suffering of the devotees. | | ✨ ai-generated | | |
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