श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 17: भगवान की गया यात्रा  »  श्लोक 51-52
 
 
श्लोक  1.17.51-52 
তীর্থে পিণ্ড দিলে সে নিস্তরে পিতৃ-গণ
সেহ,—যারে পিণ্ড দেয, তরে’ সেই জন
তোমা’ দেখিলেই মাত্র কোটি-পিতৃ-গণ
সেই-ক্ষণে সর্ব-বন্ধ পায বিমোচন
तीर्थे पिण्ड दिले से निस्तरे पितृ-गण
सेह,—यारे पिण्ड देय, तरे’ सेइ जन
तोमा’ देखिलेइ मात्र कोटि-पितृ-गण
सेइ-क्षणे सर्व-बन्ध पाय विमोचन
 
 
अनुवाद
"यदि कोई किसी पवित्र स्थान पर पितरों के लिए तर्पण करता है, तो पितरों को मुक्ति मिलती है। किन्तु मुक्ति केवल उसी को मिलती है जिसके लिए तर्पण किया गया हो। किन्तु, आपके दर्शन मात्र से लाखों पितरों को भव-बन्धन से तुरंत मुक्ति मिल जाती है।
 
"If one offers oblations to the ancestors at a holy place, the ancestors attain liberation. But liberation is attained only by the one for whom the oblation is offered. However, by merely seeing you, millions of ancestors are instantly liberated from the bondage of life.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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