ब्राह्मणों से भगवान के चरणकमलों की महिमा सुनकर भगवान आनंदित प्रेम में लीन हो गए।
Hearing from the Brahmins the glories of the Lord's lotus feet, the Lord became absorbed in blissful love.
तात्पर्य
कारण-प्रभाव वाक्यांश की व्याख्या इस प्रकार की जाती है: परमेश्वर को निराकार मानने वाले, भगवान के शाश्वत रूप के चमत्कार को नहीं समझ सकते हैं, जो आत्म-संतुष्ट आत्माओं को भी आकर्षित करता है। अनात्मवादियों पर विचार करने की प्रक्रिया भौतिक अवधारणाओं से उत्पन्न होती है। अनात्मवादी दर्शन को वश में करने के बाद, भगवान के चरण कमलों को गयासुर के सिर पर गया में स्थापित किया गया था; भगवान के चरण कमल सभी आध्यात्मिक लीलाओं का स्रोत हैं। बौद्धों की शून्यता और पंचोपाशकों की अनात्मवादिता गाधाधर के चरण कमलों के नीचे दबी हुई है। चूँकि पंचोपासक अंततः अनात्मवादी बन जाते हैं, वे केवल भेष में बौद्ध हैं। वैदिक निषेधाज्ञाओं के विरोधी काम करने वालों की धारणाएँ अज्ञानता की शरण में हैं; बौद्धों की धारणाएँ वेदों के विरोधी हैं और आध्यात्मिक अस्तित्व को नकारते हैं; और अनात्मवादियों की धारणाएँ, हालाँकि प्रत्यक्ष रूप से बौद्ध नहीं हैं, सतही रूप से वेदों का पालन करते हैं, भौतिक अस्तित्व को नकारते हैं, और बौद्ध धर्म का एक ढका हुआ रूप हैं। चूँकि ढके हुए बौद्ध अनात्मवादी और उनके अनुयायी, पंचोपाशक, गाधाधर के शाश्वत रूप और शाश्वत चरण कमलों को भौतिक मानते हैं, उनकी इंद्रियों द्वारा ग्राह्य हैं और भौतिक प्रकृति के उत्पाद हैं, वे उन्हें देखने के सौभाग्य से शाश्वत रूप से वंचित हैं। भगवान की शाश्वत विविध लीलाओं को स्वीकार करने वाले भक्त कभी भी ढके हुए बौद्ध धर्म के दर्शन का सम्मान नहीं करते हैं जो सतही रूप से वेदों का अनुसरण करता है। भगवान के चरण कमल शिव, ब्रह्मा, शुकदेव, और कई अन्य आत्म-संतुष्ट आत्माओं को आकर्षित करते हैं; वे शाश्वत परम सत्य या सच्चिदानंदविग्रह हैं। इसलिए अनात्मवादियों की पंचोपासन की अवधारणा, जिसका उद्देश्य लोगों को धोखा देना है, कुछ भी नहीं है बल्कि भोले-भाले मूर्ख लोगों को धोखा देने का एक साधन है। इसलिए सबसे बुद्धिमान भक्त अनात्मवाद को कभी स्वीकार नहीं करते हैं, जो बौद्ध धर्म का ढका हुआ रूप है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥