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श्लोक 1.17.38  |
তিলার্দ্ধেকো যে-চরণ ধ্যান কৈলে মাত্র
যম তার না হযেন অধিকার-পাত্র |
तिलार्द्धेको ये-चरण ध्यान कैले मात्र
यम तार ना हयेन अधिकार-पात्र |
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| अनुवाद |
| जो मनुष्य एक क्षण भी इन चरणकमलों का ध्यान करता है, वह कभी भी यमराज के अधिकार में नहीं आता। |
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| The person who meditates on these lotus feet even for a moment never comes under the control of Yamaraja. |
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