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श्लोक 1.17.35  |
চতুর্-দিকে দিব্য রূপ ধরি’ বিপ্র-গণ
করিতেছে পাদ-পদ্ম-প্রভাব বর্ণন |
चतुर्-दिके दिव्य रूप धरि’ विप्र-गण
करितेछे पाद-पद्म-प्रभाव वर्णन |
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| अनुवाद |
| भगवान के चरणकमलों की महिमा का वर्णन करते समय ब्राह्मण दिव्य प्राणियों के समान प्रतीत हो रहे थे। |
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| While describing the glories of the Lord's lotus feet, the brahmanas appeared like divine beings. |
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