| श्री चैतन्य भागवत » खण्ड 1: आदि-खण्ड » अध्याय 17: भगवान की गया यात्रा » श्लोक 27 |
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| | | | श्लोक 1.17.27  | সর্বত্র রক্ষক-হেন প্রভুর চরণ
বল দেখি,—কে-মতে ছাডিবে ভক্ত-গণ? | सर्वत्र रक्षक-हेन प्रभुर चरण
बल देखि,—के-मते छाडिबे भक्त-गण? | | | | | | अनुवाद | | भक्तों के रक्षक तो भगवान ही हैं, अतः वे उनके चरणकमलों को कैसे त्याग सकते हैं? | | | | God is the protector of the devotees, so how can they abandon His lotus feet? | | ✨ ai-generated | | |
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