सर्वत्र रक्षक-हेन प्रभुर चरण
बल देखि,—के-मते छाडिबे भक्त-गण?
अनुवाद
भक्तों के रक्षक तो भगवान ही हैं, अतः वे उनके चरणकमलों को कैसे त्याग सकते हैं?
God is the protector of the devotees, so how can they abandon His lotus feet?
तात्पर्य
अविचलित भक्त भगवान विष्णु के चरण कमलों की सेवा कभी नहीं त्याग सकते, जो अपने भक्तों के प्रति बहुत स्नेही हैं। प्रभु भी अपने अविचल भक्तों को कभी नहीं त्यागते। दूसरे शब्दों में, प्रभु और उनके भक्त कभी भी क्षण भर के लिए भी अलग नहीं हो सकते, बल्कि प्रभु हमेशा अपने भक्तों की हर तरह से रक्षा करते हैं। भक्त भी प्रभु को निराकार मायावादियों के आक्रमणों से बचाते हैं। जो लोग उनके विरोधी हैं, उनके क्रूर हाथों से प्रभु को मुक्त करना भक्तों की करुणा का प्रदर्शन है। इसके अलावा, अपने भक्तों के माध्यम से हमेशा अपने गौरव का प्रसार करके, प्रभु अविभक्तों को तत्काल विनाश से बचाते हैं। अपने प्रिय शुद्ध ब्राह्मणों की महिमा को बढ़ाने के लिए, प्रभु ने बुखार होने के अपने पाठ्यक्रम का निष्कर्ष निकाला और इस प्रकार इस दुनिया में कृष्ण की सेवा में लगे हुए ब्राह्मणों की महिमा का प्रसार किया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥