श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 17: भगवान की गया यात्रा  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.17.19 
পথে রহি’ করিলেন বহু প্রতিকার
তথাপি না ছাডে জ্বর,—হেন ইচ্ছা তাঙ্’র
पथे रहि’ करिलेन बहु प्रतिकार
तथापि ना छाडे ज्वर,—हेन इच्छा ताङ्’र
 
 
अनुवाद
उन्होंने अनेक प्रकार से उनका उपचार करने का प्रयत्न किया, किन्तु भगवान की इच्छा से उनका ज्वर शांत नहीं हुआ।
 
They tried to treat him in many ways, but by the will of God his fever did not subside.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)