यदि कोई सच्चा शिष्य अपने वास्तविक पूर्णत: भक्तिपूर्ण आध्यात्मिक गुरु के कमल-चरणों में ऐसी निष्ठा के गुण की कमी रखता है, तो उसे सच्चा "शिष्य" नहीं कहा जा सकता है। इस तथ्य को समझे बिना, पापी, नारकीय लोग उसकी सेवा करने के बजाय आध्यात्मिक गुरु की निंदा करके अशुभता को आमंत्रित करते हैं। ठाकुर वृंदावन ने एक सच्चे शिष्य के उचित शिष्टाचार को उज्ज्वल स्वर्ण शब्दों में दर्ज करने के लिए इस दुनिया में जिन महान लाभकारी विषयों का प्रकटीकरण किया, उसके परिणामस्वरूप, संपूर्ण दुनिया के शुद्ध वैष्णवों ने ठाकुर वृंदावन को संपूर्ण वैष्णव समुदाय के गुरुदेव के रूप में स्वीकार किया है। जिन लोगों को इस वैदिक निष्कर्ष में घृणित धोखाधड़ी प्रवृत्तियों या पापपूर्ण उद्देश्यों से जन्म लिया गया मामूली संदेह है, उनके लिए गौरा-कृष्ण के प्रति भक्ति प्राप्त करने के लिए जीवन के बाद जीवन की कोई संभावना नहीं है। नित्यानंद प्रभु की दया प्राप्त करते हुए और उनके कर्तव्यों का उत्तराधिकार प्राप्त करते हुए, ठाकुर वृंदावन ने इस दुनिया में आचार्य-गुरु के रूप में कार्य किया है। अज्ञानी, गदहा जैसे, छद्म भक्त जो धूर्त विनम्रता के नारकीय सजीव अवतार प्राकृत-सहजीयों को आदर्श आध्यात्मिक गुरु मानते हैं, वे केवल ठाकुर वृंदावन के कमल-चरणों में अपराध करते हैं। चैतन्य और नित्यानंद के आश्रय के तहत कोई भी शुद्ध भक्त कभी भी ठाकुर वृंदावन का विरोध करने वाले पापी अप-सम्प्रदायों के साथ किसी भी तरह से संबंध नहीं बनाएगा। फिर भी यदि पिछले दुष्कर्मों या दुर्भाग्य के कारण किसी का सामना ऐसे बुरे संग से होता है, तो गौड़ीय वैष्णवों के पास उस बेईमान व्यक्ति के साथ जुड़ने की कोई योग्यता नहीं है, जिसका कुत्सित मन वृंदावन दास ठाकुर के कमल-चरणों से भटक गया है। अभिमानी व्यक्तियों के समुदाय को वृंदावन दास ठाकुर की निस्वार्थ दया को समझने के लिए लाखों जन्म लगेंगे, इसलिए जब तक उनके अपराध समाप्त नहीं हो जाते हैं, उन्हें कभी भी शुद्ध वैष्णव के पवित्र सर्व-शुभ चरणों से सिर पर लात खाने का अवसर नहीं मिलेगा। शुद्ध वैष्णव की ईमानदार दया प्राप्त करने की वास्तविक इच्छा भी अज्ञानी सांसारिक पापी लोगों, धर्मप्रिय साधना करने वालों, या मानसिक विचारकों के लिए एक दुर्लभ वस्तु है। हरि, गुरु और वैष्णव के प्रति विमुख रहने वाले जीवों ने अपने पिछले जन्मों में पर्याप्त धर्म नहीं अर्जित किया है, न ही उनके हजारों पूर्वजों ने पर्याप्त धर्म अर्जित किया है, कि वे ठाकुर वृंदावन के पवित्र, पारलौकिक, परम-लाभ-प्रदान करने वाले कमल-चरणों से शुभ लात प्राप्त करने के लिए योग्य हैं। जिस क्षण शुद्ध वैष्णव के कमल-चरणों की धूल पापी व्यक्तियों के सिर पर गिरेगी, उसी क्षण वे सभी भौतिक संदूषण और छल से मुक्त हो जाएंगे और इस प्रकार भक्ति सेवा के धन के स्वामी बन जाएंगे।
