श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 17: भगवान की गया यात्रा  »  श्लोक 116
 
 
श्लोक  1.17.116 
“কৃষ্ণ রে! বাপ রে! মোর জীবন শ্রী-হরি!
কোন্ দিকে গেলা মোর প্রাণ করি’ চুরি?
“कृष्ण रे! बाप रे! मोर जीवन श्री-हरि!
कोन् दिके गेला मोर प्राण करि’ चुरि?
 
 
अनुवाद
"हे मेरे प्यारे कृष्ण! हे पिता! हे हरि, मेरे प्राण और आत्मा! मेरा हृदय चुराकर आप कहाँ चले गए?"
 
"O my beloved Krishna! O father! O Hari, my life and soul! Where have you gone after stealing my heart?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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