श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 17: भगवान की गया यात्रा  »  श्लोक 111
 
 
श्लोक  1.17.111 
দোঙ্হার নযন-জলে দোঙ্হার শরীর
সিঙ্চিত হৈলা প্রেমে, কেহ নহে স্থির
दोङ्हार नयन-जले दोङ्हार शरीर
सिङ्चित हैला प्रेमे, केह नहे स्थिर
 
 
अनुवाद
दोनों के शरीर आँसुओं से भीग गये और प्रेमोन्मत्त होकर उत्तेजित हो गये।
 
The bodies of both became wet with tears and they became excited and mad with love.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)