श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 17: भगवान की गया यात्रा  »  श्लोक 110
 
 
श्लोक  1.17.110 
শুনিযা প্রভুর বাক্য শ্রী-ঈশ্বর-পুরী
’প্রভুরে দিলেন আলিঙ্গন বক্ষে ধরি’
शुनिया प्रभुर वाक्य श्री-ईश्वर-पुरी
’प्रभुरे दिलेन आलिङ्गन वक्षे धरि’
 
 
अनुवाद
भगवान के वचन सुनकर श्री ईश्वर पुरी ने उन्हें गले लगा लिया।
 
Hearing the words of the Lord, Sri Ishwar Puri embraced him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)