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श्लोक 1.17.105  |
আর দিনে নিভৃতে ঈশ্বর-পুরী-স্থানে
মন্ত্র-দীক্ষা চাহিলেন মধুর-বচনে |
आर दिने निभृते ईश्वर-पुरी-स्थाने
मन्त्र-दीक्षा चाहिलेन मधुर-वचने |
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| अनुवाद |
| दूसरे दिन भगवान् एकान्त में ईश्वरपुरी गये और मधुर शब्दों में उनसे दीक्षा के लिए अनुरोध किया। |
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| The next day the Lord went to Ishwarpuri in solitude and requested him for initiation in sweet words. |
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