श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 17: भगवान की गया यात्रा  »  श्लोक 102
 
 
श्लोक  1.17.102 
প্রভু বলে,—“ঈশ্বর-পুরীর জন্ম-স্থান
এ মৃত্তিকা-আমার জীবন ধন-প্রাণ
प्रभु बले,—“ईश्वर-पुरीर जन्म-स्थान
ए मृत्तिका-आमार जीवन धन-प्राण
 
 
अनुवाद
भगवान ने कहा, "ईश्वर पुरी की जन्मभूमि की धूल ही मेरा जीवन, धन और जीवन शक्ति है।"
 
The Lord said, "The dust of the birthplace of Ishwar Puri is my life, wealth and vitality."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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