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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 16: श्री हरिदास ठाकुर की महिमा
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श्लोक 73
श्लोक
1.16.73
জাতি-ধর্ম লঙ্ঘি’ কর অন্য-ব্যবহার
পরলোকে কেমনে বা পাইবা নিস্তার?
जाति-धर्म लङ्घि’ कर अन्य-व्यवहार
परलोके केमने वा पाइबा निस्तार?
अनुवाद
"तुम दूसरों का धर्म अपनाने के लिए अपनी जाति और धर्म का उल्लंघन कर रहे हो। तुम्हें मोक्ष कैसे मिलेगा?"
"You are violating your caste and religion to adopt the religion of others. How will you attain salvation?"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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