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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 16: श्री हरिदास ठाकुर की महिमा
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श्लोक 72
श्लोक
1.16.72
আমরা হিন্দুরে দেখি’ নাহি খাই ভাত
তাহা ছাড’ হৈ’ তুমি মহা-বṁশ-জাত
आमरा हिन्दुरे देखि’ नाहि खाइ भात
ताहा छाड’ है’ तुमि महा-वꣳश-जात
अनुवाद
"हम तो हिंदुओं के छुए चावल भी नहीं खाते, तो फिर तुम क्यों अपनी बेइज्जती कर रहे हो? तुम तो ऊँचे घराने में पैदा हुए हो।"
"We don't even eat rice touched by Hindus, so why are you insulting yourself? You were born in a high family."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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