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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 16: श्री हरिदास ठाकुर की महिमा
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श्लोक 67
श्लोक
1.16.67
বিষযেতে থাক, কিবা, থাক যথা-তথা
এই বুদ্ধি কভু না পাসরিহ সর্বথা”
विषयेते थाक, किबा, थाक यथा-तथा
एइ बुद्धि कभु ना पासरिह सर्वथा”
अनुवाद
“चाहे आप गृहस्थ हों या संन्यासी - आप जो भी हों - इन निर्देशों को किसी भी कीमत पर न भूलें।”
“Whether you are a householder or a sannyasi – whoever you are – do not forget these instructions at any cost.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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