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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 16: श्री हरिदास ठाकुर की महिमा
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श्लोक 47
श्लोक
1.16.47
আজানু-লম্বিত-ভুজ কমল-নযন
সর্ব-মনোহর মুখ-চন্দ্র অনুপম
आजानु-लम्बित-भुज कमल-नयन
सर्व-मनोहर मुख-चन्द्र अनुपम
अनुवाद
हरिदास के हाथ घुटनों तक पहुँचे हुए थे, उनकी आँखें कमल की पंखुड़ियों के समान थीं, और उनका मोहक चन्द्रमा जैसा मुखमण्डल अतुलनीय था।
Haridasa's hands reached down to his knees, his eyes were like lotus petals, and his charming moon-like face was incomparable.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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