vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 1: आदि-खण्ड
»
अध्याय 16: श्री हरिदास ठाकुर की महिमा
»
श्लोक 47
श्लोक
1.16.47
আজানু-লম্বিত-ভুজ কমল-নযন
সর্ব-মনোহর মুখ-চন্দ্র অনুপম
आजानु-लम्बित-भुज कमल-नयन
सर्व-मनोहर मुख-चन्द्र अनुपम
अनुवाद
हरिदास के हाथ घुटनों तक पहुँचे हुए थे, उनकी आँखें कमल की पंखुड़ियों के समान थीं, और उनका मोहक चन्द्रमा जैसा मुखमण्डल अतुलनीय था।
Haridasa's hands reached down to his knees, his eyes were like lotus petals, and his charming moon-like face was incomparable.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×