श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 16: श्री हरिदास ठाकुर की महिमा  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  1.16.43 
“পরম-বৈষ্ণব হরিদাস মহাশয
তা’নে দেখি’ বন্দি-দুঃখ হৈবেক ক্ষয”
“परम-वैष्णव हरिदास महाशय
ता’ने देखि’ बन्दि-दुःख हैबेक क्षय”
 
 
अनुवाद
"हरिदास एक महान वैष्णव हैं। उनके दर्शन मात्र से हमारा कारावास-संकट दूर हो जाएगा।"
 
"Haridas is a great Vaishnava. Just seeing him will solve our prison crisis."
तात्पर्य
उन कैदियों को ख्‍याल आने लगा कि हरीदास जैसे महा-भागवत महात्‍मा के दर्शन से उनके दुःखों का निवारण हो सकता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)