श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 16: श्री हरिदास ठाकुर की महिमा  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.16.4 
আদি-খণ্ড-কথা অতি অমৃতের ধার
যহিঙ্ গৌরাঙ্গের সর্ব-মোহন বিহার
आदि-खण्ड-कथा अति अमृतेर धार
यहिङ् गौराङ्गेर सर्व-मोहन विहार
 
 
अनुवाद
आदि-खण्ड के विषय अमृत की धारा के समान हैं, जो भगवान गौरांग की लीलाओं के मनमोहक वर्णन से परिपूर्ण हैं।
 
The contents of the Adi-Khanda are like a stream of nectar, filled with captivating descriptions of the pastimes of Lord Gauranga.
तात्पर्य
सर्व-मोहन विहार वाक्य का अर्थ इस प्रकार समझाया गया है कि गौरसुंदर के बाल्य एवं यौवनकाल के कृत्यों को जो देखते हैं और जो सुनते हैं, वे सभी मोहित हो जाते हैं। गौर-नागरियों द्वारा गौरसुंदर को आरोपित परकीयभाव की काल्पनिक भावना ही सर्व-मोहन वाक्य का तात्पर्य नहीं है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)