vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 1: आदि-खण्ड
»
अध्याय 16: श्री हरिदास ठाकुर की महिमा
»
श्लोक 316
श्लोक
1.16.316
শ্রী কৃষ্ণ-চৈতন্য নিত্যানন্দ-চান্দ জান
বৃন্দাবন দাস তছু পদ-যুগে গান
श्री कृष्ण-चैतन्य नित्यानन्द-चान्द जान
वृन्दावन दास तछु पद-युगे गान
अनुवाद
श्री चैतन्य और नित्यानंद प्रभु को अपना जीवन और आत्मा मानकर, मैं, वृन्दावनदास, उनके चरणकमलों की महिमा का गान करता हूँ।
Considering Sri Chaitanya and Nityananda Prabhu as my life and soul, I, Vrindavandas, sing the glories of their lotus feet.
इस प्रकार श्री चैतन्य-भागवत, आदि-खण्ड, अध्याय सोलह - "श्री हरिदास ठाकुर की महिमा" समाप्त होता है ।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×