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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 16: श्री हरिदास ठाकुर की महिमा
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श्लोक 255
श्लोक
1.16.255
তাহাতে ও দুষ্ট-গণ মহা-ক্রোধ করে
পাষণ্ডী পাষণ্ডী মেলি’ বল্গিযাই মরে
ताहाते ओ दुष्ट-गण महा-क्रोध करे
पाषण्डी पाषण्डी मेलि’ बल्गियाइ मरे
अनुवाद
इस पर भी दुष्ट लोग बहुत क्रोधित हो जाते थे। वे नास्तिक लोग इकट्ठे होकर भक्तों की निन्दा करते थे।
Even this angered the wicked. These atheists would gather together and slander the devotees.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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