श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 16: श्री हरिदास ठाकुर की महिमा  »  श्लोक 253
 
 
श्लोक  1.16.253 
কোথাও নাহিক বিষ্ণু-ভক্তির প্রকাশ
বৈষ্ণবেরে সবেই করযে পরিহাস
कोथाओ नाहिक विष्णु-भक्तिर प्रकाश
वैष्णवेरे सबेइ करये परिहास
 
 
अनुवाद
कहीं भी भगवान विष्णु की भक्ति का नामोनिशान नहीं था। सभी लोग बस वैष्णवों का उपहास करते थे।
 
There was no trace of devotion to Lord Vishnu anywhere. Everyone simply ridiculed the Vaishnavas.
तात्पर्य
हरि के विषयों पर विचार न करने से लोग विष्णु की भक्ति से हीन हो गए थे। अत: वैष्णवों के ऊँचे स्थान को समझ न पा कर लोग उनका विडंबना ही किया करते थे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)