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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 16: श्री हरिदास ठाकुर की महिमा
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श्लोक 25
श्लोक
1.16.25
কখনো করেন নৃত্য আপনা-আপনি
কখনো করেন মত্ত-সিṁহ-প্রায ধ্বনি
कखनो करेन नृत्य आपना-आपनि
कखनो करेन मत्त-सिꣳह-प्राय ध्वनि
अनुवाद
कभी वह अकेले नाचता था, तो कभी पागल शेर की तरह दहाड़ता था।
Sometimes he would dance alone, and sometimes he would roar like a mad lion.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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