श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 16: श्री हरिदास ठाकुर की महिमा  »  श्लोक 249
 
 
श्लोक  1.16.249 
হেন হরিদাস ঠাকুরের অনুভাব
কহিযা আছেন পূর্বে শ্রী-বৈষ্ণব-নাগ
हेन हरिदास ठाकुरेर अनुभाव
कहिया आछेन पूर्वे श्री-वैष्णव-नाग
 
 
अनुवाद
इस प्रकार वैष्णव सर्प ने हरिदास ठाकुर की महिमा का वर्णन किया।
 
Thus the Vaishnava serpent described the glories of Haridasa Thakura.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)