श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 16: श्री हरिदास ठाकुर की महिमा  »  श्लोक 222
 
 
श्लोक  1.16.222 
তবে সেই ডঙ্ক-মুখে বিষ্ণু-ভক্ত নাগ
কহিতে লাগিলা হরিদাসের প্রভাব
तबे सेइ डङ्क-मुखे विष्णु-भक्त नाग
कहिते लागिला हरिदासेर प्रभाव
 
 
अनुवाद
तब विष्णु के भक्त सर्प ने सपेरे के मुख से हरिदास की महिमा का वर्णन किया।
 
Then the snake, a devotee of Vishnu, described the glory of Haridas through the mouth of the snake charmer.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)